तेरी ज़ुल्फ़ों के पेचो-ख़म टूटे!

ज़िन्दगी कंघियों में ढाल हमें,
तेरी ज़ुल्फ़ों के पेचो-ख़म टूटे|

सूर्यभानु गुप्त

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