ख़ताओं पे पनपना नहीं आता!

ज़ाहिद से ख़ताओं में तो निकलूँगा न कुछ कम,
हाँ मुझको ख़ताओं पे पनपना नहीं आता|

आनंद नारायण मुल्ला

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