रोज़ कहें अफ़्साने लोग!

हम क्या जानें क़िस्सा क्या है हम ठहरे दीवाने लोग,
उस बस्ती के बाज़ारों में रोज़ कहें अफ़्साने लोग|

राही मासूम रज़ा

Leave a Reply