ख़्वाबों में खोकर जी लिया मैंने!

उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है,
कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खोकर जी लिया मैंने|

साहिर लुधियानवी

Leave a Reply