खोए हुए शाम ओ सहर के हम हैं!

हम वहाँ हैं जहाँ कुछ भी नहीं रस्ता न दयार,
अपने ही खोए हुए शाम ओ सहर के हम हैं|

निदा फ़ाज़ली

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