ज़ुल्फ़ों की घटा छाई भी होती है!

‘क़तील’ उस दम भी रहता है यही एहसास-ए-महरूमी,
जब उन शानों पे ज़ुल्फ़ों की घटा छाई भी होती है|

क़तील शिफ़ाई

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