क़ालिब में ढल के देखते हैं!

ये क़ुर्ब* क्या है कि यक-जाँ हुए न दूर रहे,
हज़ार एक ही क़ालिब** में ढल के देखते हैं |
*Nearness, **Body


अहमद फ़राज़

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