ग़ुंचा-ए-दिल में सिमट आने वाला!

सुब्ह-दम छोड़ गया निकहत-ए-गुल की सूरत,
रात को ग़ुंचा-ए-दिल में सिमट आने वाला|

अहमद फ़राज़

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