तुझे आइने में उतार लूँ!

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ,
मिरा लफ़्ज़ लफ़्ज़ हो आईना तुझे आइने में उतार लूँ|

बशीर बद्र

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