ख़ाली नहीं रहती हैं लहू से!

आँखें हैं कि ख़ाली नहीं रहती हैं लहू से,
और ज़ख़्म-ए-जुदाई है कि भर भी नहीं जाता|

अहमद फ़राज़

Leave a Reply