सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं!

हुस्न को चाँद जवानी को कँवल कहते हैं,
उनकी सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं|

क़तील शिफ़ाई

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