ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप!

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप,
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा’द|

कैफ़ी आज़मी

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