दाद-ए-सुख़न मिली मुझे-

वो भी सराहने लगे अर्बाब-ए-फ़न के बा’द,
दाद-ए-सुख़न मिली मुझे तर्क-ए-सुख़न के बा’द|

कैफ़ी आज़मी

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