यूँ तो पहले हमको तरसाया न था!

सुर्ख़ आहन पर टपकती बूँद है अब हर ख़ुशी,
ज़िंदगी ने यूँ तो पहले हमको तरसाया न था|

क़तील शिफ़ाई

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