ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ!

फूँक डालूँगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया,
ये तिरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ|

राहत इन्दौरी

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