मेरी तरह तुझको भी तन्हा रक्खे!

हँस न इतना भी फ़क़ीरों के अकेले-पन पर,
जा ख़ुदा मेरी तरह तुझको भी तन्हा रक्खे|

अहमद फ़राज़

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