हज़ार रंग में डूबी हुई ज़मीं हूँ मैं!

यहीं हुसैन भी गुज़रे यहीं यज़ीद भी था,
हज़ार रंग में डूबी हुई ज़मीं हूँ मैं|

राहत इन्दौरी

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