हर बार तक़ाज़ा कौन करे!

ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे,
ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

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