ख़्वाब पलकों पे सजाने के लिए हैं!

आँखों में जो भर लोगे तो काँटों से चुभेंगे,
ये ख़्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं|

जाँ निसार अख़्तर

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