दिल सर-ए-शाम रख दिया!

आमद-ए-दोस्त की नवेद कू-ए-वफ़ा में आम थी,
मैंने भी इक चराग़ सा दिल सर-ए-शाम रख दिया|

अहमद फ़राज़

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