शहर को करके ग़ुलाम रख दिया!

जो भी मिला उसी का दिल हल्क़ा-ब-गोश-ए-यार था,
उसने तो सारे शहर को करके ग़ुलाम रख दिया|

अहमद फ़राज़

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