ख़ुश्बू के मकाँ कैसे हैं!

जिनसे हम छूट गए अब वो जहाँ कैसे हैं,
शाख़-ए-गुल कैसी है ख़ुश्बू के मकाँ कैसे हैं|

राही मासूम रज़ा

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