जंगल काफ़ी है वहशत के लिए!

बे-हिस दीवारों का जंगल काफ़ी है वहशत के लिए,
अब क्यूँ हम सहरा को जाएँ अब वैसे हालात कहाँ|

राही मासूम रज़ा

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