तुमने गुज़ारी रात कहाँ!

ऐ आवारा यादो फिर ये फ़ुर्सत के लम्हात कहाँ,
हमने तो सहरा में बसर की तुमने गुज़ारी रात कहाँ|

राही मासूम रज़ा

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