वहशत की सौग़ात कहाँ!

जिसको देखो फ़िक्र-ए-रफ़ू है जिसको देखो वो नासेह,
बस्ती वालों में हार आए वहशत की सौग़ात कहाँ|

राही मासूम रज़ा

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