खिलते हैं मगर शाम के बाद!

तेज़ हो जाता है ख़ुशबू का सफ़र शाम के बाद,
फूल शहरों में भी खिलते हैं मगर शाम के बाद|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

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