देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुत!

रात हो दिन हो कि ग़फ़लत हो कि बेदारी हो,
उसको देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुत|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

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