बिछड़ जाने का धड़का है बहुत!

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तक़ाज़ा है बहुत,
इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुत|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

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