जिसे दरिया किनारे छोड़ देता है!

बिछड़ के तुझसे कुछ जाना अगर तो इस क़दर जाना,
वो मिट्टी हूँ जिसे दरिया किनारे छोड़ देता है|

वसीम बरेलवी

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