इस अहद का अफ़्साना हम!

मिटते मिटते दे गए हम ज़िंदगी को रंग-ओ-नूर,
रफ़्ता रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़्साना हम|

अली सरदार जाफ़री

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