गुल-ओ-गुलज़ार हर वीराना हम!

ख़ून-ए-दिल से चश्म-ए-तर तक चश्म-ए-तर से ता-ब-ख़ाक,
कर गए आख़िर गुल-ओ-गुलज़ार हर वीराना हम|

अली सरदार जाफ़री

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