फ़रिश्ते हिसाब रखते हैं!

ये मय-कदा है वो मस्जिद है वो है बुत-ख़ाना,
कहीं भी जाओ फ़रिश्ते हिसाब रखते हैं|

राहत इन्दौरी

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