वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया!

तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था,
तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया|

सुदर्शन फ़ाकिर

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