सत्य नहीं होता सपना है!

आज एक बार फिर मैं किसी ज़माने में कविता में अपने अनूठे अंदाज़ के कारण घूम मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ|

लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का यह गीत-

सत्य नहीं होता सपना है।
सपनों में लाखों आते हैं,
जो मन वीणा पर गाते हैं;
पर सोचो,
समझो, पहचानो;
उनमें कौन-कौन अपना है?
सत्य नहीं होता सपना है।

सपनों में अनगिन जग रचते,
पर कितनों की हम सुधि रखते;
फिर भी मोह,
हमें सपनों से;
यह भी तो केवल सपना है?
सत्य नहीं होता सपना है।

जिसका सपना टूट न जाये,
जिसका अपना छूट न जाये;
ऐसा किसे-
हुआ सपना है,
ऐसा मिला किसे अपना है?
सत्य नहीं होता सपना है।

आज के लिए इतना ही, नमस्कार|

*********

Leave a Reply