ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की!

हम कि दुख ओढ़ के ख़ल्वत में पड़े रहते हैं,
हमने बाज़ार में ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की|

अहमद फ़राज़

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