होंठों ने जुम्बिश नहीं की!

सामने उसके कभी उसकी सताइश* नहीं की,
दिल ने चाहा भी अगर होंठों ने जुम्बिश नहीं की|

*प्रशंसा
अहमद फ़राज़

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