यारों से दामन न छुड़ाओ इंशा-जी!

नहीं सिर्फ़ ‘क़तील’ की बात यहाँ कहीं ‘साहिर’ है कहीं ‘आली’ है,
तुम अपने पुराने यारों से दामन न छुड़ाओ इंशा-जी|

क़तील शिफ़ाई

Leave a Reply