रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ!

दुनिया तिरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ,
तू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ|

मुनव्वर राना

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