सब्र में भी हज़रत-ए-अय्यूब रहा हूँ!

फेंक आए थे मुझ को भी मिरे भाई कुएँ में,
मैं सब्र में भी हज़रत-ए-अय्यूब रहा हूँ|

मुनव्वर राना

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