बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन!

मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन,
आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन|

निदा फ़ाज़ली

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