गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी!

सबसे नज़र बचा के वो मुझको कुछ ऐसे देखता,
एक दफ़ा तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी|

परवीन शाकिर

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