छुप गया अपने ग़मों का हाल भी!

उसकी सुख़न-तराज़ियाँ मेरे लिए भी ढाल थीं,
उसकी हँसी में छुप गया अपने ग़मों का हाल भी|

परवीन शाकिर

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