ये ज़रूरतों का सलाम है!

कहाँ अब दुआओं की बरकतें वो नसीहतें वो हिदायतें,
ये मुतालबों का ख़ुलूस है ये ज़रूरतों का सलाम है|

बशीर बद्र

Leave a Reply