वाराणसी, लखनऊ यात्रा-2

मैंने यात्रा से वापस लौटने के बाद एक ब्लॉग पोस्ट लिखी थी वाराणसी, लखनऊ आदि की यात्रा के बारे में, उसका एक भाग लिखने के बाद यहाँ गोवा में ही, पालोलिम बीच तक 2-3 दिन की आउटिंग पर जाने का प्रोग्राम बन गया, इसलिए उस यात्रा का विवरण अधूरा रह गया| अब संक्षेप में उस यात्रा का विवरण लिखूँगा और कुछ फोटो शेयर करूंगा|

वाराणसी प्रवास के दूसरे दिन, भोले बाबा के काशी विश्वनाथ मंदिर जाने का प्रोग्राम था और यह बताया गया था कि इससे पहले भैंरो बाबा के दर्शन करना भी अनिवार्य है, सो इस दिन हमने पहले भैरों बाबा के और उसके बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए| जैसा मैंने पहले भी लिखा है बाबा विश्वनाथ अब पहले के मुकाबले अत्यधिक विशाल भवन में हैं, कई प्रवेश द्वार हैं और भक्तों की भीड़ भी अब और अधिक हो गई है| दर्शन के समय क्योंकि कैमरा आदि ले जाना सख्त मना है अतः इस धार्मिक यात्रा से जुड़ा कोई चित्र शेयर नहीं कर पाऊँगा बस यही कि काशी जाकर यह धार्मिक गतिविधि भी हमने सपरिवार पूरी श्रद्धा के साथ पूरी की|

मंदिरों के दर्शन की बात करें तो संकट मोचन मंदिर के दर्शन हम लोग पहले ही कर चुके थे, कुछ लोग इस बार भी दर्शन करने गए, इसके अलावा भारत माता मंदिर, सारनाथ आदि का भ्रमण भी हम पहले कर चुके थे सो इस बार नहीं किया|

कुछ समय हमने वाराणसी के बाजारों में भ्रमण करने और कुछ प्रसिद्ध मिठाइयां, पकवान यहाँ तक कि कहीं की प्रसिद्ध चाय आदि का भी आस्वादन करने में बिताया|

इसके बाद अगले दिन हम ट्रेन द्वारा लखनऊ के लिए रवाना हुए| बहुत लंबे समय के बाद हमने ट्रेन द्वारा यात्रा की, वाराणसी से लखनऊ पहुँचने की निर्धारित अवधि 6 घंटे से कम है लेकिन उसमें 2 घंटे ज्यादा लग गए, ट्रेन चलने में होने वाली देरी का यह अनुभव लंबे समय के बाद हुआ, जिससे काफी खीझ भी हो रही थे, लेकिन बाद में अखबार में पढ़ा कि बहुत सी ट्रेन कोहरे के कारण रद्द हो गईं, तब हमें संतोष हुआ कि हमारे साथ ऐसा तो नहीं हुआ| हम क्योंकि अब गोवा में रहते हैं इसलिए सर्दी और

उस रात हम लखनऊ में हजरतगंज के पास ‘सरोवर पोर्टिको’ होटल, में जाकर रुक गए, जहां से अगले दिन हमें अगले पड़ावों पर जाना था|

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|
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