लखनऊ, अयोध्या यात्रा-3

वाराणसी यात्रा का विवरण मैंने शेयर किया था और उसमें लखनऊ पहुँचने और वहाँ एक होटल में रुकने का उल्लेख भी किया था, लखनऊ पहुँचने पर शाम हो गई थी अतः उस दिन अन्य किसी गतिविधि के लिए समय नहीं था| हाँ अगले दिन अयोध्या जाने के लिए टैक्सी की व्यवस्था की और हम सो गए| लंबे समय से हम गोवा में रह रहे हैं और सर्दी को तो भूल ही गए हैं| गोवा में हम अभी भी ज्यादातर एसी चलाते हैं, और लखनऊ में ‘ए सी’ बंद होने पर भी बार बार यह आशंका होती थी कहीं ‘ए सी’ ठंडी हवा तो नहीं दे रहा है, वैसे वहाँ वातानुकूलन की सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था थी जो रूम से भी नियंत्रित होती है|

बहरहाल अगले दिन होटल में सुबह का नाश्ता करने के बाद हमने अयोध्या के लिए निकलने का विचार बनाया था| होटल में भोजन आदि की दरें ऐसी थीं कि वहाँ भोजन करना अपने बूते की बात नहीं थी, लेकिन सुबह का नाश्ता क्योंकि कंप्लीमेंट्री था और बुफ़े सिस्टम के अंतर्गत बहुत से व्यंजनों का विकल्प उपलब्ध था तब भला उसको कैसे छोड़ा जा सकता था|

सुबह साढ़े आठ बजे के आसपास हम लोग नाश्ता करने के बाद टैक्सी से अयोध्या के लिए रवाना हुए, थोड़ी ठंड तो थी लेकिन मौसम साफ था, दूर तक स्पष्ट दिखाई दे रहा था, परंतु लखनऊ की सीमा से बाहर निकलने के बाद ही कुहरे की परतें चढ़ती चली गईं और लगभग आधा रास्ता जाने के बाद सामने के वाहन आदि दिखना बहुत मुश्किल हो गया था, लगभग अयोध्या के आसपास पहुँचने पर ही वातावरण क्लीयर हुआ|

काशी और अयोध्या में बड़ा अंतर यह रहा कि काशी में भोले बाबा का भव्य मंदिर परिसर जहां बनकर तैयार है, वहीं अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, इतना ही नहीं इस परिसर को सुंदर बनाने के लिए नगर में काफी तोड़-फोड़ चल रही है, रास्तों को चौड़ा किया जा रहा और ऐसा लगता है कि एक-दो वर्ष बाद जब श्रद्धालु यहाँ जाएंगे तो उनको एक अलग ही अनुभव होगा|

खैर अयोध्या में वर्तमान स्थिति में प्रभु श्रीराम जी के दर्शन करना एक धार्मिक कार्य था, जो हमने श्रद्धापूर्वक संपन्न किया| वहाँ बंदरों की भी मौज है परिसर में हर तरफ से आकर वे प्रसाद पाने के लिए लालायित रहते हैं| मंदिर दर्शन के बाद हमने नगर भ्रमण किया, सरयू नदी के तट पर गए और शाम होने से पहले हम लखनऊ में अपने होटल लौट आए थे| हाँ शाम को वापस आने के बाद हमारे पास इतना समय तो था ही कि हम हजरतगंज के ‘मोती महल’ मिष्ठान्न भंडार पर हो आएं| पहले जब हम लखनऊ में रहते थे तो अनेक बार हमने यहाँ भोजन और मिठाइयों का आस्वादन किया था, इस बार हमारा टारगेट मुख्य रूप से मिठाइयां थीं, हमने कई प्रकार की मिठाइयां मंगाईं, कुछ वहाँ खाईं और कुछ पैक कराकर ले गए, जिनको हमने अगली शाम तक खाया|

लखनऊ में 10 वर्ष तक हमारा घर रहा था, हम तो उसमें से काफी समय तक लखनऊ और ऊंचाहार के बीच आते-जाते रहते थे, लेकिन हमारे लिए लखनऊ देखा-भाला था, इसलिए अगले दिन हमने लखनऊ में कुछ मित्रों और संबंधियों से मिलने का प्लान बनाया, उसके अनुसार काम किया, उस दिन ‘आलम बाग’ की एक और मिठाई की दुकान का मीठा चखने का अवसर मिला| इस प्रकार सोशल भ्रमण, खान-पान आदि में हमने यह दिन बिता दिया! अगले दिन तो हमको लौटना ही था और हम दोपहर बाद 3-30 बजे की फ्लाइट पकड़कर शाम 6 बजे गोवा हवाई अड्डे और 7 बजे अपने घर पहुँच गए|

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|
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