हम नदियाँ हैं तुम सागर हो!

इक भीक के दोनों कासे हैं इक प्यास के दोनो प्यासे हैं,
हम खेती हैं तुम बादल हो हम नदियाँ हैं तुम सागर हो|

इब्न ए इंशा

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