न कभी तुम्हारी झिझक गई!

भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले,
न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई|

बशीर बद्र

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