मेरी रात कैसे चमक गई!

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई,
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई|

बशीर बद्र

2 Comments

    1. shri.krishna.sharma says:

      Thanks a lot ji

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