Categories
Film Song

अब रात गुजरने वाली है!

आज मैं 1951 में रिलीज़ हुई राजकपूर जी की फिल्म- ‘आवारा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे हसरत जयपुरी जी ने लिखा था और शंकर जयकिशन जी की संगीत जगत की प्रसिद्ध जोड़ी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने अपने मधुर कंठ से यह गीत गाया था|

लीजिए आज प्रस्तुत है यह मधुर गीत-

आ जाओ तड़पते हैं अरमां,
अब रात गुजरनेवाली है
मैं रोऊँ यहाँ, तुम चुप हो वहाँ,
अब रात गुजरनेवाली है|

चाँद की रंगत उड़ने लगी
वो तारों के दिल अब डूब गये, डूब गये
है दर्दभरा बेचैन समा,
अब रात गुजरनेवाली है|


इस चाँद के डोले में आई नज़र
ये रात की दुल्हन चल दी किधर, चल दी किधर
आवाज़ तो दो, खोये हो कहाँ,
अब रात गुजरनेवाली है|

घबरा के नज़र भी हार गई
तकदीर को भी नींद आने लगी, नींद आने लगी
तुम आते नहीं, मैं जाऊँ कहाँ,
अब रात गुजरनेवाली है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******

Categories
Film Song

ओ जाने वाले हो सके तो!

कल हमारे प्रिय गायक, महान कलाकार और इंसान मुकेश चंद्र माथुर जी का जन्म दिन है| जिन्हें हम प्रेम से सिर्फ ‘मुकेश’ नाम से पुकारते हैं|

उनकी स्मृति में प्रस्तुत आज का यह गीत फिल्म- ‘बंदिनी’ से है, जिसे लिखा था शैलेन्द्र जी ने और इसका संगीत दिया था सचिन देव बर्मन जी ने|

मुकेश जी के गाए गीत मुझ जैसे बहुत से लोगों को जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं|

आइए आज उस महान गायक की स्मृति में उनका गाया यह गीत दोहराते हैं-


ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना,
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना|


बचपन के तेरे मीत तेरे संग के सहारे,
ढूंढेंगे तुझे गली-गली सब ये ग़म के मारे|
पूछेगी हर निगाह कल तेरा ठिकाना|
ओ जाने वाले —

है तेरा वहां कौन सभी लोग हैं पराए,
परदेश की गर्दिश में कहीं, तू भी खो न जाए|
कांटों भरी डगर है तू दामन बचाना|
ओ जाने वाले—


दे देके ये आवाज कोई हर घड़ी बुलाए,
फिर जाए जो उस पार कभी लौट के न आए,
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो बताना|
ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******

Categories
Film Song

बस प्यार ही प्यार पले !

आज किशोर कुमार जी द्वारा स्वयं निर्मित फिल्म – ‘दूर गगन की छाँव में’ के लिए उनके ही द्वारा गाया गया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, इस गीत का संगीत भी किशोर कुमार जी ने ही दिया है और इसमें उनके पुत्र अमित कुमार की भी आवाज है|

कुल मिलाकर ये एक बहुत सुंदर और आशावादी गीत है, लीजिए प्रस्तुत है ये गीत-  

आ चल के तुझे मैं लेके चलूँ एक ऐसे गगन के तले,

जहाँ ग़म भी ना हो, आँसू भी ना हो, बस प्यार ही प्यार पले|

++++

सूरज की पहली किरण से आशा का सवेरा जागे

चंदा की किरण से धुलकर घनघोर अंधेरा भागे,

कभी धूप खिले, कभी छाँव मिले, लंबी सी डगर ना खले|

+++++

जहाँ दूर नज़र दौड़ाएं, आज़ाद गगन लहराये

जहाँ रंगबिरंगे पंछी आशा का संदेसा लाये, 

सपनों में पली, हँसती हो कली, जहाँ शाम सुहानी ढले|

++++

सपनों के ऐसे जहां में, जहाँ प्यार ही प्यार खिला हो

हम जा के वहाँ खो जाएं, शिकवा ना कोई गीला हो,

कहीं बैर ना हो, कोई गैर ना हो, सब मिल के यूँ चलते चलें|

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|

*******

Categories
Film Song Memoirs Poetry

दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है!

संतोषानंद जी के बहाने आज की बात करना चाहूँगा| मेरे विचार में संतोषानंद जी इसका उदाहरण हैं, कि किस प्रकार साहित्य की शुद्धतावादी मनोवृत्ति वास्तव में कविता को ही नुकसान पहुंचाती है|

संतोषानंद जी की आज जो स्थिति हो गई है, उसके पीछे उनके पुत्र के साथ हुआ हादसा जिम्मेदार है, मैं उसको भूलते हुए, उससे पहले की उनकी स्थिति की बात करना चाहूँगा|

मुझे अक्सर यह खयाल आता है कि यदि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने समकालीन विद्वद-जनों के अनुमोदन की प्रतीक्षा की होती तो क्या वे ऐसे अमर ग्रंथ दे पाते, सच्चाई तो यह है कि उनके समकालीन विद्वानों ने तो उनको मान्यता दी ही नहीं थी|

सच्चाई यह भी है कि मैं और मेरे साथी कविगणों ने संतोषानंद जी को कभी गंभीरता से नहीं लिया था, फिल्मों में सफल होने के बावज़ूद! मुझे याद है कि मैंने अपने संस्थान में उनको एक कवि सम्मेलन में आमंत्रित किया था क्योंकि मेरे बॉस उनके फैन थे, और मेरे बॉस कोई कवि नहीं थे, बहरहाल मैंने संतोषानंद जी को आमंत्रित किया, जिस कवि सम्मेलन का संचालन- श्रीकृष्ण तिवारी जी कर रहे थे और कई साहित्यिक रूप से मान्यता प्राप्त कवि उसमें शामिल थे|

उस कवि सम्मेलन में भी कुछ आत्म मुग्ध कवियों ने संतोषानंद जी को उचित सम्मान नहीं दिया, और उस समय तो संतोषानंद जी भी सफलता के नशे में चूर थे और बोले कि मंच पर बैठे सभी कवि मुझसे जलते हैं, क्योंकि ये लोग मेरी तरह सफल नहीं हो पाए|

उस समय उनका यह कथन मुझे अहंकार से भरा लगा, लेकिन मुझे अब लगता है कि इसमें मठाधीशों से मान्यता न मिलने का उनका दर्द शामिल था| सामान्य जन को आपके साहित्यिक मानदंडों से मतलब नहीं है| जो बात दिल से निकलकर दिल तक पहुँचती है, वही वास्तविक रचना है –

एक प्यार का नग़मा है, मौजों की रवानी है,
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है|

कवि ने कुछ कहा, लोगों के दिल तक पहुँच गया, और चमत्कार हो गया| आप सोचते रहिए लोगों को क्या पसंद आया, क्यों पसंद आया!
फिर यही बात होती है- ‘उतर-दखिन के पंडिता, रहे विचार-विचार

ध्यान से सोचता हूँ तो खयाल आता है, कि संतोषानंद जी ने कितने सहज तरीके से ये बड़ी बातें कह दी हैं-

कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है
जीवन का मतलब तो, आना और जाना है|

***
दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है|
आदि-आदि|

उनके अनेक गीत ऐसे हैं जिन्होंने लोगों के दिलों में अपना स्थान बना लिया है|

आज संतोषानंद जी की आर्थिक स्थित, उनकी रुग्णता और उनके बेटे के साथ हुए गंभीर हादसे के कारण बहुत खराब है, लेकिन मन है कि उनकी रचनाशीलता को प्रणाम करूं और उनका जीवन सुख से व्यतीत होने की कामना करूं|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******

Categories
Film Song

सदा खुश रहे तू !

आज मैं फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत 1961 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘प्यार का सागर’ के लिए मुकेश जी ने रवि जी के संगीत निर्देशन में गाया था,इस गीत के रचनाकार थे प्रेम धवन जी|

लीजिए प्रस्तुत है यह गीत, जो इतना समय बीत जाने के बाद, आज भी लोगों को याद है –

सदा खुश रहे तू जफ़ा करने वाले
दुआ कर रहे हैं दुआ करने वाले|

सुनाते ग़म-ए-दिल, जो तुम पास होते
मेरी बेकसी पे भी क्या तुम न रोते

मगर क्या दिखाएं तुम्हे दिल के छाले
दुआ कर रहे हैं दुआ करने वाले
सदा खुश रहे तू|

सितम और भी हों तो वो भी किये जा
हो ग़म और भी हों तो वो भी दिए जा
नहीं फिर भी तुझसे गिला करने वाले|
दुआ कर रहे हैं दुआ करने वाले||

सदा खुश रहे तू, जफ़ा करने वाले
दुआ कर रहे हैं दुआ करने वाले|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********


Categories
Film Song

रहम जब अपने पे आता है तो हंस लेता हूँ!

आज पुरानी फिल्म- किनारे-किनारे के लिए मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत लिखा है न्याय शर्मा जी ने और इसका संगीत दिया है जयदेव जी ने|

यह जीवन बहुत जटिल है| कभी-कभी ऐसी स्थितियाँ बन जाती हैं कि किस बात पर हंसा जाए और किस बात पर रोया जाए पता ही नहीं चलता| कुछ ऐसी ही स्थिति का गीत है ये|

लीजिए आज प्रस्तुत है, मुकेश जी का गाया यह अमर गीत –

जब ग़म ए इश्क़ सताता है
तो हँस लेता हूँ,
हादसा याद जब आता है
तो हँस लेता हूँ|

मेरी उजड़ी हुई दुनिया में
तमन्ना का चिराग़,
जब कोई आ के जलाता है
है तो हँस लेता हूँ|

जब ग़म ए इश्क़ सताता है
तो हँस लेता हूँ|


कोई दावा नहीं फ़रियाद नहीं
तंज़ नहीं,
रहम जब अपने पे आता है
तो हँस लेता हूँ|

जब ग़म ए इश्क़ सताता
है तो हँस लेता हूँ.


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।
******

Categories
Film Song

संसार है एक नदिया!

साथियो आज मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ 1975 में रिलीज़ हुई फ़िल्म- ‘रफ्तार’ का एक गीत जिसे – अभिलाष जी ने लिखा था। इस शानदार गीत को मेरे परम प्रिय गायक मुकेश जी ने आशा भौंसले जी के साथ गाया था और इसके लिए संगीत दिया था सोनिक जी ने। इस गीत को मदनपुरी जी और अभिनेत्री मौसमी चटर्जी जी पर फिल्माया गया था।

इस गीत में, एक अलग प्रकार से जीवन दर्शन प्रस्तुत किया गया है और यह बहुत सुंदर गीत है-

संसार है इक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं!
न जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं!!
संसार है इक नदिया….


चलते हुए जीवन की,
रफ़्तार में एक लय है!
इक राग में इक सुर में,
संसार की हर शय है !!
संसार की हर शय है!!


इक तार पे गर्दिश में,
ये चाँद सितारे है!
न जाने कहाँ जाएँ,
हम बहते धारे हैं!!
संसार है इक नदिया….


धरती पे अम्बर की,
आँखों से बरसती हैं!
इक रोज़ यही बूंदें,
फिर बादल बनती हैं!
इस बनने बिगड़ने के,
दस्तूर में सारे हैं!


कोई भी किसी के लिए,
अपना न पराया है!
रिश्तों के उजाले में,
हर आदमी साया है!
हर आदमी साया है!!

क़ुदरता के भी देखो तो,
ये खेल निराले हैं!
न जाने कहाँ जाएँ,
हम बहते धारे हैं!!
संसार है इक नदिया……


है कौन वो दुनिया में,
न पाप किया जिसने!
बिन उलझे कांटो से,
हैं फूल चुने किसने!
हैं फूल चुने किसने!!
बेदाग नहीं कोई,
यहां पापी सारे हैं!
संसार है एक नदिया!


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

*******

Categories
Film Song

बस एक निगाह प्यार की!

आज मोहम्मद रफी साहब का एक गाना शेयर कर रहा हूँ| रफी साहब ने हर तरह के गाने गाए हैं, और आज का गाना मस्ती से भरा हुआ है| वर्ष 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- मेरे सनम के लिए मजरूह सुल्तानपुरी साहब के लिखे इस गीत का संगीत दिया है ओ पी नैयर साहब ने|


लीजिए इस मस्ती भरे गीत का आनंद लीजिए-

पुकारता चला हूँ मैं
गली गली बहार की,
बस एक छाँव जुल्फ की
बस एक निगाह प्यार की|

ये दिल्लगी ये शोखियाँ सलाम की
यही तो बात हो रही है काम की,
कोई तो मुड़ के देख लेगा इस तरफ
कोई नज़र तो होगी मेरे नाम की|
पुकारता चला हूँ मैं…


सुनी मेरी सदा तो किस यकीन से
घटा उतर के आ गई ज़मीन पे,
रही यही लगन तो ऐ दिल-ए-जवां
असर भी हो रहेगा एक हसीन पे|
पुकारता चला हूँ मैं …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
*******

Categories
Film Song

चांद आहें भरेगा!

आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक- मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर करूंगा| नायिका के सौंदर्य का वर्णन करने वाले अनेक गीत आपने सुने होंगे, लेकिन इस ऊंचाई वाला गीत बहुत मुश्किल से सुनने को मिलता है, और फिर मुकेश जी की आवाज़ तो इसमें अलग से जान डाल ही रही है|

लीजिए  फिल्म- ‘फूल बने अंगारे’ के लिए आनंद बख्शी जी के लिखे इस गीत का आनंद लीजिए, जिसे कल्याण जी आनंद जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने गाया है-

चांद आहें भरेगा,
फूल दिल थाम लेंगे,
हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|


आँखें नाज़ुक सी कलियां,
बात मिश्री की डलियां,
होंठ गंगा के साहिल,
ज़ुल्फ़ें जन्नत की गलियां|
तेरी खातिर फ़रिश्ते,
सर पे इल्ज़ाम लेंगे|

हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|


चुप न होगी हवा भी,
कुछ कहेगी घटा भी,
और मुमकिन है तेरा,
ज़िक्र कर दे खुदा भी|
फिर तो पत्थर ही शायद,
ज़ब्त से काम लेंगे|

हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|


चाँद आहें भरेगा,
फूल दिल थाम लेंगे,
हुस्न की बात चली तो,
सब तेरा नाम लेंगे|

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|

                        *******

Categories
Film Song

फिर भी हम अकेले हैं!

आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ जो सबा अफ़गानी जी का लिखा हुआ है और जहां तक मुझे याद था, मैंने इसे बहुत पहले अनूप जलोटा जी की आवाज में सुना था, लेकिन अब मालूम हुआ की ये टी सीरीज़ की ओर से ‘कसम तेरी कसम’ की एल्बम के लिए सोनू निगम जी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया है और इसका संगीत दिया है- नरेश शर्मा जी ने|

खैर मुझे इस गीत के बोल बहुत अच्छे लगते हैं और ये भी आज की ज़िंदगी की एक सच्चाई है| लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-

ज़िन्दगी की राहों में
रंजो ग़म के मेले हैं|
भीड़ हैं क़यामत की
फिर भी हम अकेले हैं|

ज़िन्दगी की राहों में
रंजो ग़म के मेले हैं|


आईने के सौ टुकड़े
हमने करके देखा है|
एक में भी तनहा थे
सौ में भी अकेले हैं|


ज़िन्दगी की राहों में
रंजो ग़म के मेले हैं|


जब शबाब आया है
आँख क्यों चुराते हो,
बचपन में हम और तुम
साथ साथ खेले हैं|

भीड़ हैं क़यामत की
और हम अकेले हैं|


गेसुओं के साये में
एक शब गुज़ारी थी,
आपसे जुदा हो के
आज तक अकेले हैं|

ज़िन्दगी की राहों में,
रंजो ग़म के मेले हैं|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
*******