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भीगी पलकें न झुका!

आज मुझे मेरे प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है | फिल्म- साथी के लिए इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था- नौशाद साहब ने|

कुल मिलाकर इस गीत में ऐसा दिव्य वातावरण तैयार होता है, ऐसा लगता है की प्रेम का एक अनोखा स्वरूप उद्घाटित होता है, जिसमें प्रेम और पूजा, आपस में घुल-मिल जाते हैं| लीजिए इस अमर गीत का आनंद लीजिए-

हुस्न-ए-जानां इधर आ,
आईना हूँ मैं तेरा|
मैं संवारूंगा तुझे,
सारे ग़म दे-दे मुझे,
भीगी पलकें न झुका,
आईना हूँ मैं तेरा|


कितने ही दाग उठाए तूने,
मेरे दिन-रात सजाए तूने,
चूम लूँ आ मैं तेरी पलकों को,
दे दूँ ये उम्र तेरी ज़ुल्फों को,
ले के आँखों के दिए,
मुस्कुरा मेरे लिए,
मेरी तस्वीर-ए-वफ़ा,
आईना हूँ मैं तेरा|


तेरी चाहत है इबादत मेरी,
देखता रहता हूँ सूरत तेरी,
घर तेरे दम से है मंदिर मेरा,
तू है देवी मैं पुजारी तेरा,
सज़दे सौ बार करूं,
आ तुझे प्यार करूं,
मेरे आगोश में आ,
आईना हूँ मैं तेरा|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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नींद सूरज-सितारों को आने लगे!

वक़्त भी क्या-क्या चालें चलता है, आज तो देश और दुनिया के लिए मानो परीक्षा की घड़ी है| वक़्त की इस चाल की चिंता तो हम सभी को करनी है और करनी भी पड़ेगी, लेकिन यहाँ मैं इससे अलग जाते हुए नायिका की चाल, चालबाजी नहीं जी, सिर्फ ‘चाल’, उसके चलने के अंदाज़ के बारे में बात करूंगा, क्योंकि कवि-शायर तो उसकी हर अदा पर कुर्बान जाते हैं, जिसमें ‘चाल’ भी शामिल है|

हालांकि पाक़ीज़ा फिल्म में तो राजकुमार नायिका की चाल पर पाबंदी लगा देना चाहते हैं, जब वो ट्रेन में सोती हुई नायिका देखकर कहते हैं- ‘आपके पाँव बहुत सुंदर हैं, इन्हें ज़मीन पर मत उतारना’!


खैर चाल के बारे में बात भी मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी की गाई गीत पंक्तियों के साथ करूंगा-


तौबा ये मतवाली चाल,
झुक जाए फूलों की डाल, चांद और सूरज आकर मांगें
तुझसे रंग-ओ-जमाल,
हसीना तेरी मिसाल कहाँ|


मुकेश जी की आवाज में ही एक और गीत की पंक्तियाँ याद आ रही हैं, जिसे नीरज जी ने लिखा है-


चाल ऐसी है मदहोश मस्ती भरी,
नींद सूरज-सितारों को आने लगे,
इतने नाज़ुक क़दम चूम पाएँ अगर,
सोते-सोते बियाबान गाने लगें,
मत महावर रचाओ बहुत पाँव में,
फर्श का मर्मरी दिल दहल जाएगा|


अब क्या करूं फिर से मुकेश जी का ही गाया एक और गीत याद आ रहा है-


गोरी तेरे चलने पे, मेरा दिल कुर्बां,
तेरा चलना, तेरा रुकना, तेरा मुड़ना तौबा,
मेरा दिल कुर्बां|


लीजिए एक और गीत याद आ रहा है ‘चाल’ पर-


ठुमक-ठुमक मत चलो, हाँ जी मत चलो,
किसी का दिल धड़केगा,
मंद-मंद मत हंसो, हाँ जी मत हंसो,
कोई प्यासा भटकेगा|

वैसे जब नायिका की गलियों की तरफ नायक जाता है, तब उसकी चाल भी कुछ अलग ही होती है न-

चल मेरे दिल, लहरा के चल,

मौसम भी है, वादा भी है|

उसकी गली का फासला,

थोड़ा भी है, ज्यादा भी है|


अब इसके बाद क्या कहूँ, एक गीत की पंक्तियाँ फिलहाल याद आ रही हैं-


हम चल रहे थे, तुम चल रहे थे,
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे थे|


तो भाई मेरे जलने की कोई बात नहीं है, सब चलते रहें, ये दुनिया भी चलती रहे और सब खुश रहें|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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दर्द के नाम से वाक़िफ़ न जहां हो कोई !

आज एक गीत याद आ रहा है, फिल्म- ‘नई रोशनी’ से, यह गीत मोहम्मद रफ़ी साहब ने फिल्म अभिनेता- स्वर्गीय राज कुमार जी के लिए गाया है| राज कुमार जी नशे की एक्टिंग काफी अच्छी करते थे| उनका ‘वक़्त’ फिल्म का एक संवाद बहुत प्रसिद्ध है- ‘जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकते, मिस्टर शेनोय!” हाँ तो, इस गीत के लेखक थे – राजेन्द्र कृष्ण जी और संगीत दिया था- रवि जी ने|


ये ज़िंदगी भी ऐसी है कि जब तक ठीक से चलती रहे, हम ज्यादा सोचते ही नहीं लेकिन जब पटरी से उतर जाती है, तब इंसान क्या-क्या नहीं सोचता! यही लगता है कि ये सब लोग जीवन को जी कैसे लेते हैं, हम इनकी तरह क्यों नहीं जी पाते! लीजिए यह गीत पढ़िये और उस फिल्म की जो याद आए या इसको सुनकर जो कुछ भी आप महसूस करते हैं, उसको आने दीजिए जी-


किस तरह जीते हैं ये लोग
बता दो यारो,
हम को भी जीने का
अंदाज़ सिखा दो यारो|
किस तरह जीते हैं ये लोग
बता दो यारो|


प्यार लेते हैं कहाँ से
यह ज़माने वाले,
उन गली कूचों का
रस्ता तो दिखा दो यारो|
हम को भी जीने का
अंदाज़ सिखा दो यारो|


दर्द के नाम से
वाक़िफ़ न जहाँ हो कोई,
ऐसी महफ़िल में हमें भी तो
बिठा दो यारो|
हम को भी जीने का अंदाज़
सिखा दो यारो|


साथ देना है तो
खुद पीने की आदत डालो,
वर्ना मैखाने का दर
हम से छुड़ा दो यारो|
हम को भी जीने का अंदाज़
सिखा दो यारो,
किस तरह जीते हैं ये लोग
बता दो यारो|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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तेरी मेहंदी लेकर दिन उगा!

नीरज जी हिन्दी साहित्यिक मंचों के अत्यंत सुरीले और सृजनशील गीतकार थे, जिन्होंने फिल्म जगत में भी अपना विशेष स्थान बनाया था|

आज नीरज जी का लिखा एक मस्ती भरा फिल्मी गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म- शर्मीली के लिए सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार जी ने अपने मस्ती भरे अंदाज़ में गाया था|


लीजिए आज प्रस्तुत है नीरज जी का लिखा ये मस्ती भरा गीत-

ओ मेरी, ओ मेरी, ओ मेरी शर्मीली,
आओ ना, तड़पाओ ना|

तेरा काजल लेकर रात बनी, रात बनी
तेरी मेंहदी लेकर दिन उगा, दिन उगा,
तेरी बोली सुनकर सुर जगे, सुर जगे
तेरी खुशबू लेकर फूल खिला, फूल खिला|
जान-ए-मन तू है कहाँ
ओ मेरी शर्मीली…


तेरी राहों से गुज़रे जब से हम, जब से हम
मुझे मेरी डगर तक याद नहीं, याद नहीं,
तुझे देखा जब से दिलरुबा, दिलरुबा
मुझे मेरा घर तक याद नहीं, याद नहीं|
जान-ए-मन तू है कहाँ
ओ मेरी शर्मीली…


ओ नीरज नयना आ ज़रा, आ ज़रा
तेरी लाज का घूँघट खोल दूं, खोल दूं
तेरे आँचल पर कोई गीत लिखूँ, गीत लिखूँ
तेरे होंठों में अमृत घोल दूँ, घोल दूँ
जान-ए-मन तू है कहाँ
ओ मेरी शर्मीली…


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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टूटा नहीं दिल ये अभी!

आज मैं फिर से अपने प्रिय गायक मुकेश जी का एक खूबसूरत गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्म-दूल्हा-दुल्हन के लिए यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया था, गीत के लेखक थे- इंदीवर और संगीतकार थे – कल्याणजी-आनंदजी|
वैसे भी मुकेश जी उदासी भरे नग़मों के शहंशाह माने जाते हैं, हालांकि उन्होंने मस्ती भरे गीत भी बहुत गाये हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है मुकेश जी का उदासी भरा, दिल टूटने की स्थितियों का यह गीत, जीवन की कुछ स्थितियों को चित्रित करने के लिए ऐसे गीत भी बहुत ज़रूरी हैं-


तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी,
हम भी क्या याद करेंगे
तुम्हें चाहा था कभी|
तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी|


ये वही होठ हैं
जो गीत मेरे गाते थे,
ये वही गेसू हैं
जो मुझपे बिखर जाते थे|
आज क्या हो गया
क्यों हो गए बेगाने सभी|
तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी|


अपने ख्वाबों का जहाँ
मुझ में कभी ढूँढा था,
तुम वही हो कि कभी
तुमने मुझे पूजा था|
देखते हो हमें ऐसे कि
न देखा हो कभी|
तुम सितम और करो
टूटा नहीं दिल ये अभी|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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दिल सोगवार आज भी है!

आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसकी विशेषता है गायक भूपिंदर सिंह की गूँजती आवाज| वैसे उन्होंने यह गीत 1985 में रिलीज़ हुई फिल्म- ऐतबार के लिए, भप्पी लाहिड़ी जी के संगीत निर्देशन में, आशा भोंसले जी के साथ मिलकर गाया है| इसके गीतकार हैं- हसन कमाल जी|


लीजिए आज प्रस्तुत है ये गीत-

किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है,

कहाँ हो तुम के
ये दिल बेकरार आज भी है|
किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है|
वो वादियाँ वो फिजायें के
हम मिले थे जहां,
मेरी वफ़ा का वहीं
पर मजार आज भी है|
किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है|

न जाने देख के उनको ये
ये क्यों हुआ एहसास,
के मेरे दिल पे उन्हें
इख़्तियार आज भी है|
किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है|

वो प्यार जिसके लिए
हमने छोड़ दी दुनिया,
वफ़ा की राह में घायल
वो प्यार आज भी है|
किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है|

यकीं नहीं हैं मगर
आज भी ये लगता है,
मेरी तलाश में शायद
बहार आज भी है|
किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है|

न पूछ कितने मोहब्बत में
ज़ख्म खाए हैं,
के जिनको सोच के दिल
सोगवार आज भी है|

वो प्यार जिस के लिए
हमने छोड़ दी दुनिया,
वफ़ा की राह में घायल
वो प्यार आज भी है|

किसी नज़र को तेरा
इंतज़ार आज भी है|
कहा हो तुम के ये
दिल बेकरार आज भी है|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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