ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएं!

अब के गर तू मिले तो हम तुझसे,
ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएं|

अहमद फराज़

मजबूरियों का उज़्र करें!

हम भी मजबूरियों का उज़्र करें,
फिर कहीं और मुब्तिला हो जाएं|

अहमद फराज़

कल जाने क्या से क्या हो जाएं!

तू भी हीरे से बन गया पत्थर,
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं|

अहमद फराज़

ये जुनूँ “फ़राज़” कब तक!

किसी बेवफ़ा की ख़ातिर ये जुनूँ “फ़राज़” कब तक,
जो तुम्हें भुला चुका है, उसे तुम भी भूल जाओ|

अहमद फ़राज़

मेरी बात मान जाओ!

ये जुदाइयों के रस्ते बड़ी दूर तक गए हैं,
जो गया वो फिर न लौटा, मेरी बात मान जाओ|

अहमद फ़राज़

तो अभी से छोड़ जाओ!

मेरे हमसफ़र पुराने मेरे अब भी मुंतज़िर हैं,
तुम्हें साथ छोड़ना है तो अभी से छोड़ जाओ|

अहमद फ़राज़

उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ!

वो कहानियाँ अधूरी, जो न हो सकेंगी पूरी,
उन्हें मैं भी क्यूँ सुनाऊँ, उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ|

अहमद फ़राज़

किसी दर्द को जगाओ!

ये उदासियों के मौसम कहीं रायेगाँ न जाएं,
किसी ज़ख़्म को कुरेदो, किसी दर्द को जगाओ|

अहमद फ़राज़